पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
समाचार में
- संयुक्त राष्ट्र द्वारा गठित स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर प्रथम वैश्विक वैज्ञानिक प्रतिवेदन जारी किया है।
प्रमुख निष्कर्ष
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास विनियमन से अधिक तीव्र: कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताएँ, विशेषकर अग्रणी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल तथा स्वायत्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता अभिकर्ता, वैज्ञानिक समझ एवं वर्तमान शासन-व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक तीव्र गति से विकसित हो रहे हैं।
- इससे गंभीर जोखिमों एवं संभावित हानियों की आशंका बढ़ रही है।
- कमजोर एवं विखंडित कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन: वर्तमान कृत्रिम बुद्धिमत्ता विनियमन एवं नैतिक ढाँचे विखंडित हैं।
- इन पर कुछ चुनिंदा कंपनियों का वर्चस्व है।
- साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताओं एवं उससे जुड़े जोखिमों का स्वतंत्र रूप से आकलन करने हेतु प्रभावी तंत्र का अभाव है।
- वैश्विक संगणनात्मक विभाजन में वृद्धि: कृत्रिम बुद्धिमत्ता में नेतृत्व अब उन्नत संगणनात्मक अवसंरचना, अर्धचालकों, क्लाउड सुविधाओं तथा आँकड़ा-संग्रहों (डेटासेट) तक पहुँच पर निर्भर होता जा रहा है।
- वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगणन क्षमता का लगभग 75% संयुक्त राज्य अमेरिका तथा लगभग 15% चीन के पास है, जबकि शेष विश्व के हिस्से में केवल 10% क्षमता आती है।
- यह संगणनात्मक विभाजन (कंप्यूट डिवाइड) अनेक देशों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के निर्माता के स्थान पर केवल उपभोक्ता बनाकर छोड़ सकता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता के केंद्रीकरण से जुड़े जोखिम: कुछ चुनिंदा कंपनियाँ एवं देश उन्नत अर्धचालकों, क्लाउड अवसंरचना, आधारभूत कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल तथा उनके अनुप्रयोग मंचों सहित संपूर्ण कृत्रिम बुद्धिमत्ता मूल्य-शृंखला पर नियंत्रण स्थापित कर रहे हैं।
- इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास का अत्यधिक केंद्रीकरण हो रहा है।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डीपफेक एवं प्रभावित करने वाले कलनविधि (एल्गोरिद्म) साझा सत्य की अवधारणा को कमजोर कर रहे हैं।
- इससे दुष्प्रचार को बढ़ावा मिल रहा है तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ प्रभावित हो रही हैं।
- भू-राजनीतिक चिंताएँ: कुछ सीमित कृत्रिम बुद्धिमत्ता महाशक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता स्वास्थ्य, रक्षा, सार्वजनिक सेवाओं तथा आधारभूत अवसंरचना जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में देशों की रणनीतिक स्वायत्तता को कमजोर कर सकती है।
- भारत के लिए निहितार्थ: प्रतिवेदन के निष्कर्ष इंडियाएआई मिशन जैसी पहलों तथा देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता हेतु स्वदेशी संगणनात्मक अवसंरचना में निवेश की आवश्यकता को सुदृढ़ करते हैं।
- इससे दीर्घकालिक तकनीकी निर्भरता को कम किया जा सकेगा।
सिफारिशें
- सरकारों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन को सुदृढ़ करने, स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमताओं (संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल) का विकास करने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया गया है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुरक्षित, समावेशी एवं सभी के लिए लाभकारी बन सके।
- अधिक प्रभावी एवं समन्वित वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन व्यवस्था विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े जोखिमों का स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- वैज्ञानिक संसाधनों एवं संगणनात्मक अवसंरचना तक बेहतर पहुँच उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
- प्रतिस्पर्धा तथा मुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने वाली नीतियाँ अपनाई जानी चाहिए।
- जनहित आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश बढ़ाया जाए तथा विकासशील देशों की भागीदारी का विस्तार किया जाए।
- मानवाधिकारों एवं बाल अधिकारों के प्रभाव आकलन के स्थापित मानकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास एवं उपयोग में लागू किया जाए।
समावेशिता हेतु भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति एवं शासन-व्यवस्था
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता हेतु राष्ट्रीय रणनीति: नीति आयोग द्वारा जून 2018 में प्रारंभ की गई इस रणनीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भारत की विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु एक परिवर्तनकारी साधन के रूप में चिन्हित किया गया है।
- इसका उद्देश्य आवश्यक सेवाओं की पहुँच, वहनीयता तथा गुणवत्ता में सुधार करना है।
- भारत के कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन दिशा-निर्देश, 2025: इन दिशा-निर्देशों में मानव-केंद्रित सिद्धांतों, जैसे—निष्पक्षता, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता को अपनाया गया है।
- इनका उद्देश्य पक्षपात, बहिष्करण तथा अपारदर्शी निर्णय-निर्माण से उत्पन्न जोखिमों को कम करना है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन एवं आर्थिक समूह : भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन एवं आर्थिक समूह का गठन किया है।
- यह एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी निकाय है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन से संबंधित नीतियों के निर्माण एवं विभिन्न मंत्रालयों के मध्य समन्वय हेतु भारत की केंद्रीय संस्थागत व्यवस्था के रूप में कार्य करेगा।
स्रोत :IE
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